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Thursday, 9 February 2017

'सहज' के दोहे

रचनाकार- डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज'
विधा- दोहे
जीवन है अनमोल यह, इसको नहीं बिगाड़.
यह है दुर्लभ से मिला,समझ नहीं खिलवाड़.
सोच सार्थक हो सदा,दिन कैसे भी होयँ.
निश्चित काटेंगे वही, जो खेतों में बोयँ.
सदा सफलता के नियम,रहें अटल ले मान.
इसी लिए तू कर जतन,छोड़ सभी अभिमान.
आवश्यकता ठीक है, इक्षा का क्या अंत.
सब उस पर ही छोड़ दे, उसकी शक्ति अनंत.
'सहज'सीख ले पाठ तू,रहे मगन हर हाल.
समय बड़ा बलवान है, मत बांधे पुल-पाल.
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@डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज'
अधिवक्ता/साहित्यकार
सर्वाधिकार सुरक्षित.

Thursday, 14 January 2016

Srijan....सृजन: मकर संक्रांति- गुरुपर्व -लोहरी की शुभ कमाना

Srijan....सृजन: मकर संक्रांति- गुरुपर्व -लोहरी की शुभ कमाना: मकर संक्रांति -गुरुपर्व - लोढ़ी की समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई. गुड -तिल के लड्डू मिलें, खाएं -बाँटें प्रेम. पर्वों का सन्देश हैं, च...

मकर संक्रांति- गुरुपर्व -लोहरी की शुभ कमाना


मकर संक्रांति -गुरुपर्व - लोढ़ी की समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई.
गुड -तिल के लड्डू मिलें, खाएं -बाँटें प्रेम.
पर्वों का सन्देश हैं, चलें न गंदे गेम .
सद्भावी ,
डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज

Wednesday, 13 January 2016

साहित्यमंडल, श्री नाथद्वारा में ५-६ जनवरी १६ को दो दिवसीय साहित्योत्सव

सहित्यमंडल, श्री नाथद्वारा में ५-६ जनवरी२०१६ को संपन्न, दो दिवसीय अखिल भारतीय साहित्योत्सव, जो दो साहित्य मनीषियों -श्री भारतेंदु बाबू हरिश्चंद (५ को) एवं सहित्यमंडल के संस्थापक श्री भगवती प्रसाद देवपुरा (६को) की पुन्यस्मृति को समर्पित था, में दोनों दिन विचार सत्र - रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम-पुरस्कार/ सम्मान समारोह- अखिल भारतीय कवि सम्मलेन आदि से सज्जित रहे.इनमें देश भर से सैकड़ों की संख्या में, प्रख्यात साहित्यकारों- पत्रकारों- फिल्मकारों- संपादकों-प्रकाशकों-समाजसेवियों-अनेक क्षेत्रों के विद्वानों कीउपस्थिति/ जीवंत भागीदारी अति उत्साह जनक रही.
आप के इस नाचीज दोस्त ने, कवि सम्मलेन की अध्यक्षता की- सम्मान/ पुरस्कार वितरित किया और सभी सत्रों में, जीवंत भागीदारी से सदन का स्नेह लूटा.
-डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज'

डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज' पर केन्द्रित शेशाम्रित के 'सहज' विशेषांक में 'आकुल' की प्रस्तुति


’सहज’ सहज हैं सहज से, कह देते हैं बात।
धारा-प्रवाह सहज से, कहने में निष्‍णात।
कहने में निष्‍णात, विषय कोई सा भी हो।
कहते हैं बेबाक, सदन कोई सा भी हो।
कविपुंगव ने काव्‍य, रचे वे ‘सहज’ सहज हैं।
मेरे हैं प्रिय दोस्‍त, बिलाशक ‘सहज’ सहज हैं।
2-
सागर सा व्‍यक्तित्‍व है, जोश अपार अथाह।
जनवादी आक्रोश का, बहता काव्‍य प्रवाह।
बहता काव्‍य प्रवाह, वाक्‍चातुर्य प्रबल है।
मणिकांचन संयोग, राजनीति में दखल है।
’आकुल’ है कृतकृत्‍य, ‘सहज’ सा साथी पाकर।
बदल दिया संसार, भरा गागर में सागर।
-डॉ.गोपाल कृष्ण भट्ट 'आकुल'

डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज' के व्यक्तित्व - कृतित्व पर केन्द्रित 'सहज' विशेषांक में गोपाल क्रिसन भट्ट 'आकुल के दो कुण्डलिया छंद


’सहज’ सहज हैं सहज से, कह देते हैं बात।
धारा-प्रवाह सहज से, कहने में निष्‍णात।
कहने में निष्‍णात, विषय कोई सा भी हो।
कहते हैं बेबाक, सदन कोई सा भी हो।
कविपुंगव ने काव्‍य, रचे वे ‘सहज’ सहज हैं।
मेरे हैं प्रिय दोस्‍त, बिलाशक ‘सहज’ सहज हैं।
2-
सागर सा व्‍यक्तित्‍व है, जोश अपार अथाह।
जनवादी आक्रोश का, बहता काव्‍य प्रवाह।
बहता काव्‍य प्रवाह, वाक्‍चातुर्य प्रबल है।
मणिकांचन संयोग, राजनीति में दखल है।
’आकुल’ है कृतकृत्‍य, ‘सहज’ सा साथी पाकर।
बदल दिया संसार, भरा गागर में सागर।
-डॉ.गोपाल कृष्ण भट्ट 'आकुल'